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राष्ट्रीय चिह्न:::राष्ट्रीय पेड़
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राष्ट्रीय चिह्न :::राष्ट्रीय फल
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राष्ट्रीय फल
एक गूदे दार फल, जिसे पकाकर खाया जाता है या कच्चा होने पर इसे अचार आदि में इस्तेमाल किया जाता है, यह मेग्नीफेरा इंडिका का फल अर्थात आम है जो उष्ण कटिबंधी हिस्से का सबसे अधिक महत्वपूर्ण और व्यापक रूप से उगाया जाने वाला फल है। इसका रस दार फल विटामिन ए, सी तथा डी का एक समृद्ध स्रोत है। भारत में विभिन्न आकारों, मापों और रंगों के आमों की 100 से अधिक किस्में पाई जाती हैं। आम को अनंत समय से भारत में उगाया जाता रहा है। कवि कालीदास ने इसकी प्रशंसा में गीत लिखे हैं। अलेक्सेंडर ने इसका स्वाद चखा है और साथ ही चीनी धर्म यात्री व्हेन सांग ने भी। मुगल बादशाह अकबर ने बिहार के दरभंगा में 1,00,000 से अधिक आम के पौधे रोपे थे, जिसे अब लाखी बाग के नाम से जाना जाता है।
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राष्ट्रीय चिह्न :::राष्ट्रीय खेल
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राष्ट्रीय खेल
जब हॉकी के खेल की बात आती है तो भारत ने हमेशा विजय पाई है। हमारे देश के पास आठ ओलम्पिक स्वर्ण पदकों का उत्कृष्ट रिकॉर्ड है। भारतीय हॉकी का स्वर्णिम युग 1928-56 तक था जब भारतीय हॉकी दल ने लगातार 6 ओलम्पिक स्वर्ण पदक प्राप्त किए। भारतीय हॉकी दल ने 1975 में विश्व कप जीतने के अलावा दो अन्य पदक (रजत और कांस्य) भी जीते। भारतीय हॉकी संघ ने 1927 में वैश्विक संबद्धता अर्जित की और अंतरराष्ट्रीय हॉकी संघ की सदस्यता प्राप्त की।
इस प्रकार भारतीय हॉकी संघ के इतिहास की शुरूआत ओलम्पिक में अपनी स्वर्ण गाथा आरंभ करने के लिए की गई। इस दौरे में भारत को 21 मैचों में से 18 मैच भारत ने जीते और प्रख्यात खिलाड़ी ध्यान चंद सभी की आंखों में बस गए जब भारत के कुल 192 गोलों में से 100 गोल उन्होंने अकेले किए। यह मैच एमस्टर्डम में 1928 में हुआ और भारत लगातार लॉस एंजेलस में 1932 के दौरान तथा बर्लिन में 1936 के दौरान जीतता गया और इस प्रकार उसने ओलम्पिक में स्वर्ण पदकों की हैटट्रिक प्राप्त की।
स्वतंत्रता के बाद भारतीय दल ने एक बार फिर 1948 लंदन ओलम्पिक, 1952 हेलसिंकी गेम तथा मेलबॉर्न ओलम्पिक में स्वर्ण पदक जीत कर हैटट्रिक प्राप्त की।
इस स्वर्ण युग के दौरान भारत ने 24 ओलम्पिक मैच खेले और सभी 24 मैचों में जीत कर 178 गोल बनाए (प्रति मैच औसतन 7.43 गोल) तथा केवल 7 गोल छोड़े। भारत को 1964 टोकियो ओलम्पिक और 1980 मॉस्को ओलम्पिक में दो अन्य स्वर्ण पदक प्राप्त हुए।
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राष्ट्रीय चिह्न :::राष्ट्रीय नदी
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राष्ट्रीय नदी
गंगा भारत की सबसे लंबी नदी है जो पर्वतों, घाटियों और मैदानों में 2,510 किलो मीटरकी दूरी तय करती है। यह हिमालय के गंगोत्री ग्लेशियर में भागीरथि नदी के नाम से बर्फ के पहाड़ों के बीच जन्म लेती है। इसमें आगे चलकर अन्य नदियां जुड़ती हैं, जैसे कि अलकनंदा, यमुना, सोन, गोमती, कोसी और घाघरा। गंगा नदी का बेसिन विश्व के सबसे अधिक उपजाऊ क्षेत्र के रूप में जाना जाता है और यहां सबसे अधिक घनी आबादी निवास करती है तथा यह लगभग 1,000,000 वर्ग किलो मीटर में फैला हिस्सा है। नदी पर दो बांध बनाए गए हैं - एक हरिद्वार में और दूसरा फरक्का में। गंगा नदी में पाई जाने वाली डॉलफिन एक संकटापन्न जंतु है, जो विशिष्ट रूप से इसी नदी में वास करती है।
गंगा नदी को हिन्दु समुदाय में पृथ्वी की सबसे अधिक पवित्र नदी माना जाता है। मुख्य धार्मिक आयोजन नदी के किनारे स्थित शहरों में किए जाते हैं जैसे वाराणसी, हरिद्वार और इलाहाबाद। गंगा नदी बंगलादेश के सुंदर वन द्वीप में गंगा डेल्टा पर आकर व्यापक हो जाती है और इसके बाद बंगाल की खाड़ी में मिलकर इसकी यात्रा पूरी होती है।
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राष्ट्रीय चिह्न :::राष्ट्रीय गीत
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राष्ट्रीय गीत
वन्दे मातरम गीत बंकिम चन्द्र चटर्जी द्वारा संस्कृत में रचा गया है; यह स्वतंत्रता की लड़ाई में लोगों के लिए प्ररेणा का स्रोत था। इसका स्थान जन गण मन के बराबर है। इसे पहली बार 1896 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सत्र में पहली राजनीतिक मौके पर गाया गया था। इसका पहला अंतरा इस प्रकार है:
वंदे मातरम्, वंदे मातरम्!
सुजलाम्, सुफलाम्, मलयज शीतलाम्,
शस्यश्यामलाम्, मातरम्!
वंदे मातरम्!
शुभ्रज्योत्सनाम् पुलकितयामिनीम्,
फुल्लकुसुमित द्रुमदल शोभिनीम्,
सुहासिनीम् सुमधुर भाषिणीम्,
सुखदाम् वरदाम्, मातरम्!
वंदे मातरम्, वंदे मातरम्॥
गद्य रूप 1 में श्री अरबिन्द द्वारा किए गए अंग्रेजी अनुवाद का हिन्दी अनुवाद इस प्रकार है:
मैं आपके सामने नतमस्तक होता हूं। ओ माता,
पानी से सींची, फलों से भरी,
दक्षिण की वायु के साथ शान्त,
कटाई की फसलों के साथ गहरा,
माता!
उसकी रातें चाँदनी की गरिमा में प्रफुल्लित हो रही है,
उसकी जमीन खिलते फूलों वाले वृक्षों से बहुत सुंदर ढकी हुई है,
हंसी की मिठास, वाणी की मिठास,
माता, वरदान देने वाली, आनंद देने वाली।
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राष्ट्रीय चिह्न :::राष्ट्र–गान
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राष्ट्र–गान
भारत का राष्ट्र गान अनेक अवसरों पर बजाया या गाया जाता है। राष्ट्र गान के सही संस्करण के बारे में समय समय पर अनुदेश जारी किए गए हैं, इनमें वे अवसर जिन पर इसे बजाया या गाया जाना चाहिए और इन अवसरों पर उचित गौरव का पालन करने के लिए राष्ट्र गान को सम्मान देने की आवश्यकता के बारे में बताया जाता है। सामान्य सूचना और मार्गदर्शन के लिए इस सूचना पत्र में इन अनुदेशों का सारांश निहित किया गया है।
राष्ट्र गान - पूर्ण और संक्षिप्त संस्करण
स्वर्गीय कवि रविन्द्र नाथ टैगोर द्वारा "जन गण मन" के नाम से प्रख्यात शब्दों और संगीत की रचना भारत का राष्ट्र गान है। इसे इस प्रकार पढ़ा जाए:
जन-गण-मन अधिनायक, जय हे
भारत-भाग्य-विधाता,
पंजाब-सिंधु गुजरात-मराठा,
द्रविड़-उत्कल बंग,
विन्ध्य-हिमाचल-यमुना गंगा,
उच्छल-जलधि-तरंग,
तव शुभ नामे जागे,
तव शुभ आशिष मांगे,
गाहे तव जय गाथा,
जन-गण-मंगल दायक जय हे
भारत-भाग्य-विधाता
जय हे, जय हे, जय हे
जय जय जय जय हे।
उपरोक्त राष्ट्र गान का पूर्ण संस्करण है और इसकी कुल अवधि लगभग 52 सेकंड है।
राष्ट्र गान की पहली और अंतिम पंक्तियों के साथ एक संक्षिप्त संस्करण भी कुछ विशिष्ट अवसरों पर बजाया जाता है। इसे इस प्रकार पढ़ा जाता है:
जन-गण-मन अधिनायक, जय हे
भारत-भाग्य-विधाता,
जय हे, जय हे, जय हे
जय जय जय जय हे।
संक्षिप्त संस्करण को चलाने की अवधि लगभग 20 सेकंड है।
जिन अवसरों पर इसका पूर्ण संस्करण या संक्षिप्त संस्करण चलाया जाए, उनकी जानकारी इन अनुदेशों में उपयुक्त स्थानों पर दी गई है।
राष्ट्र गान बजाना
- राष्ट्र गान का पूर्ण संस्करण निम्नलिखित अवसरों पर बजाया जाएगा:
- नागरिक और सैन्य अधिष्ठापन;
- जब राष्ट्र सलामी देता है (अर्थात इसका अर्थ है राष्ट्रपति या संबंधित राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों के अंदर राज्यपाल/लेफ्टिनेंट गवर्नर को विशेष अवसरों पर राष्ट्र गान के साथ राष्ट्रीय सलामी - सलामी शस्त्र प्रस्तुत किया जाता है);
- परेड के दौरान - चाहे उपरोक्त (ii) में संदर्भित विशिष्ट अतिथि उपस्थित हों या नहीं;
- औपचारिक राज्य कार्यक्रमों और सरकार द्वारा आयोजित अन्य कार्यक्रमों में राष्ट्रपति के आगमन पर और सामूहिक कार्यक्रमों में तथा इन कार्यक्रमों से उनके वापस जाने के अवसर पर ;
- ऑल इंडिया रेडियो पर राष्ट्रपति के राष्ट्र को संबोधन से तत्काल पूर्व और उसके पश्चात;
- राज्यपाल/लेफ्टिनेंट गवर्नर के उनके राज्य/संघ राज्य के अंदर औपचारिक राज्य कार्यक्रमों में आगमन पर तथा इन कार्यक्रमों से उनके वापस जाने के समय;
- जब राष्ट्रीय ध्वज को परेड में लाया जाए;
- जब रेजीमेंट के रंग प्रस्तुत किए जाते हैं;
- नौ सेना के रंगों को फहराने के लिए।
- राष्ट्र गान का संक्षिप्त संस्करण मेस में सलामती की शुभकामना देते समय बजाया जाएगा।
- राष्ट्र गान उन अन्य अवसरों पर बजाया जाएगा जिनके लिए भारत सरकार द्वारा विशेष आदेश जारी किए गए हैं।
- आम तौर पर राष्ट्र गान प्रधानमंत्री के लिए नहीं बजाया जाएगा जबकि ऐसा विशेष अवसर हो सकते हैं जब इसे बजाया जाए।
- जब राष्ट्र गान एक बैंड द्वारा बजाया जाता है तो राष्ट्र गान के पहले श्रोताओं की सहायता हेतु ड्रमों का एक क्रम बजाया जाएगा ताकि वे जान सकें कि अब राष्ट्र गान आरंभ होने वाला है। अन्यथा इसके कुछ विशेष संकेत होने चाहिए कि अब राष्ट्र गान को बजाना आरंभ होने वाला है। उदाहरण के लिए जब राष्ट्र गान बजाने से पहले एक विशेष प्रकार की धूमधाम की ध्वनि निकाली जाए या जब राष्ट्र गान के साथ सलामती की शुभकामनाएं भेजी जाएं या जब राष्ट्र गान गार्ड ऑफ ओनर द्वारा दी जाने वाली राष्ट्रीय सलामी का भाग हो। मार्चिंग ड्रिल के संदर्भ में रोल की अवधि धीमे मार्च में सात कदम होगी। यह रोल धीरे से आरंभ होगा, ध्वनि के तेज स्तर तक जितना अधिक संभव हो ऊंचा उठेगा और तब धीरे से मूल कोमलता तक कम हो जाएगा, किन्तु सातवीं बीट तक सुनाई देने योग्य बना रहेगा। तब राष्ट्र गान आरंभ करने से पहले एक बीट का विश्राम लिया जाएगा।
राष्ट्र गान को सामूहिक रूप से गाना
- राष्ट्र गान का पूर्ण संस्करण निम्नलिखित अवसरों पर सामूहिक गान के साथ बजाया जाएगा:
- राष्ट्रीय ध्वज को फहराने के अवसर पर, सांस्कृतिक अवसरों पर या परेड के अलावा अन्य समारोह पूर्ण कार्यक्रमों में। (इसकी व्यवस्था एक कॉयर या पर्याप्त आकार के, उपयुक्त रूप से स्थापित तरीके से की जा सकती है, जिसे बैंड आदि के साथ इसके गाने का समन्वय करने के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा। इसमें पर्याप्त सार्वजनिक श्रव्य प्रणाली होगी ताकि कॉयर के साथ मिलकर विभिन्न अवसरों पर जनसमूह गा सके);
- सरकारी या सार्वजनिक कार्यक्रम में राष्ट्रपति के आगमन के अवसर पर (परंतु औपचारिक राज्य कार्यक्रमों और सामूहिक कार्यक्रमों के अलावा) और इन कार्यक्रमों से उनके विदा होने के तत्काल पहले।
- राष्ट्र गान को गाने के सभी अवसरों पर सामूहिक गान के साथ इसके पूर्ण संस्करण का उच्चारण किया जाएगा।
- राष्ट्र गान उन अवसरों पर गाया जाए, जो पूरी तरह से समारोह के रूप में न हो, तथापि इनका कुछ महत्व हो, जिसमें मंत्रियों आदि की उपस्थिति शामिल है। इन अवसरों पर राष्ट्र गान को गाने के साथ (संगीत वाद्यों के साथ या इनके बिना) सामूहिक रूप से गायन वांछित होता है।
- यह संभव नहीं है कि अवसरों की कोई एक सूची दी जाए, जिन अवसरों पर राष्ट्र गान को गाना (बजाने से अलग) गाने की अनुमति दी जा सकती है। परन्तु सामूहिक गान के साथ राष्ट्र गान को गाने पर तब तक कोई आपत्ति नहीं है जब तक इसे मातृ भूमि को सलामी देते हुए आदर के साथ गाया जाए और इसकी उचित गरिमा को बनाए रखा जाए।
- विद्यालयों में, दिन के कार्यों में राष्ट्र गान को सामूहिक रूप से गा कर आरंभ किया जा सकता है। विद्यालय के प्राधिकारियों को राष्ट्र गान के गायन को लोकप्रिय बनाने के लिए अपने कार्यक्रमों में पर्याप्त प्रावधान करने चाहिए तथा उन्हें छात्रों के बीच राष्ट्रीय ध्वज के प्रति सम्मान की भावना को प्रोत्साहन देना चाहिए।
सामान्य
- जब राष्ट्र गान गाया या बजाया जाता है तो श्रोताओं को सावधान की मुद्रा में खड़े रहना चाहिए। यद्यपि जब किसी चल चित्र के भाग के रूप में राष्ट्र गान को किसी समाचार की गतिविधि या संक्षिप्त चलचित्र के दौरान बजाया जाए तो श्रोताओं से अपेक्षित नहीं है कि वे खड़े हो जाएं, क्योंकि उनके खड़े होने से फिल्म के प्रदर्शन में बाधा आएगी और एक असंतुलन और भ्रम पैदा होगा तथा राष्ट्र गान की गरिमा में वृद्धि नहीं होगी।
- जैसा कि राष्ट्र ध्वज को फहराने के मामले में होता है, यह लोगों की अच्छी भावना के लिए छोड दिया गया है कि वे राष्ट्र गान को गाते या बजाते समय किसी अनुचित गतिविधि में संलग्न नहीं हों।
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राष्ट्रीय चिह्न::: राष्ट्रीय पशु
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राष्ट्रीय पशु
राजसी बाघ, तेंदुआ टाइग्रिस धारीदार जानवर है। इसकी मोटी पीली लोमचर्म का कोट होता है जिस पर गहरी धारीदार पट्टियां होती हैं। लावण्यता, ताकत, फुर्तीलापन और आपार शक्ति के कारण बाघ को भारत के राष्ट्रीय जानवर के रूप में गौरवान्वित किया है। ज्ञात आठ किस्मों की प्रजाति में से शाही बंगाल टाइगर (बाघ) उत्तर पूर्वी क्षेत्रों को छोड़कर देश भर में पाया जाता है और पड़ोसी देशों में भी पाया जाता है, जैसे नेपाल, भूटान और बंगलादेश। भारत में बाघों की घटती जनसंख्या की जांच करने के लिए अप्रैल 1973 में प्रोजेक्ट टाइगर (बाह्य परियोजना) शुरू की गई। अब तक इस परियोजना के अधीन 27 बाघ के आरक्षित क्षेत्रों की स्थापना की गई है जिनमें 37, 761 वर्ग कि.मी. क्षेत्र शामिल है।
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राष्ट्रीय चिह्न :::राष्ट्रीय पुष्प
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राष्ट्रीय पुष्प
कमल (निलम्बो नूसीपेरा गेर्टन) भारत का राष्ट्रीय फूल है। यह पवित्र पुष्प है और इसका प्राचीन भारत की कला और गाथाओं में विशेष स्थान है और यह अति प्राचीन काल से भारतीय संस्कृति का मांगलिक प्रतीक रहा है।
भारत पेड़ पौधों से भरा है। वर्तमान में उपलब्ध डाटा वनस्पति विविधता में इसका विश्व में दसवां और एशिया में चौथा स्थान है। अब तक 70 प्रतिशत भौगोलिक क्षेत्रों का सर्वेक्षण किया गया उसमें से भारत के वनस्पति सर्वेक्षण द्वारा 47,000 वनस्पति की प्रजातियों का वर्णन किया गया है।
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राष्ट्रीय चिह्न ::: राष्ट्रीय पंचांग
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राष्ट्रीय पंचांग
राष्ट्रीय कैलेंडर शक संवत पर आधारित है, चैत्र इसका माह होता है और ग्रेगोरियन कैलेंडर के साथ साथ 22 मार्च, 1957 से सामान्यत: 365 दिन निम्नलिखित सरकारी प्रयोजनों के लिए अपनाया गया:
- भारत का राजपत्र,
- आकाशवाणी द्वारा समाचार प्रसारण,
- भारत सरकार द्वारा जारी कैलेंडर और
- लोक सदस्यों को संबोधित सरकारी सूचनाएं
राष्ट्रीय कैलेंडर ग्रेगोरियम कैलेंडर की तिथियों से स्थायी रूप से मिलती-जुलती है। सामान्यत: 1 चैत्र 22 मार्च को होता है और लीप वर्ष में 21 मार्च को।
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राष्ट्रीय चिह्न, : : : राष्ट्रीय पक्षी
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राष्ट्रीय पक्षी
भारतीय मोर, पावों क्रिस्तातुस, भारत का राष्ट्रीय पक्षी एक रंगीन, हंस के आकार का पक्षी पंखे आकृति की पंखों की कलगी, आँख के नीचे सफेद धब्बा और लंबी पतली गर्दन। इस प्रजाति का नर मादा से अधिक रंगीन होता है जिसका चमकीला नीला सीना और गर्दन होती है और अति मनमोहक कांस्य हरा 200 लम्बे पंखों का गुच्छा होता है। मादा भूरे रंग की होती है, नर से थोड़ा छोटा और इसमें पंखों का गुच्छा नहीं होता है। नर का दरबारी नाच पंखों को घुमाना और पंखों को संवारना सुंदर दृश्य होता है।
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राष्ट्रीय चिह्न : : : राजकीय प्रतीक
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राजकीय प्रतीक
राष्ट्र का प्रतीक अशोक के सारनाथ शेर राजधानी से लिया गया है। मूल रूप में चार शेर हैं जो एक दूसरे की ओर मुंह किए खड़े थे जो हाथी के एक दौड़ता घोड़ा, एक सांड़ और सिंह, जो घंटी के आकार के कमल के ऊपर बीच में आने वाले चक्र द्वारा अलग अलग किए गए थे। जो पोलिश किए हुए एक ही पत्थर के टुकड़े पर तराशा गया था, राजधानी के शीर्ष पर कानून का चक्र (धर्म चक्र) था।
राष्ट्र के प्रतीक में जिसे 26 जनवरी 1950 में भारत सरकार द्वारा अपनाया गया था केवल तीन सिंह दिखाई देते हैं और चौथा छिपा हुआ है, दिखाई नहीं देता है। चक्र केंद्र में दिखाई देता है, सांड दाहिनी ओर और घोड़ा बायीं ओर और अन्य चक्र की बाहरी रेखा बिल्कुल दाहिने और बाई छोर पर। घंटी के आकार का कमल छोड दिया जाता है। शब्द सत्यमेव जयते मुंडकोपनिषद से लिए गए हैं, जिसका अर्थ है केवल सच्चाई की विजय होती है, के नीचे देवनागरी लिपि में अंकित है।
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राष्ट्रीय चिह्न : : : राष्ट्रीय ध्वज
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राष्ट्रीय चिह्न
राष्ट्रीय ध्वज
राष्ट्रीय झंडा क्षैतिजीय तिरंगा है जिसमें सबसे ऊपर गहरा केसरिया, सफेद बीच में और गहरा हरा सबसे नीचे बराबर अनुपात में हैं। झंडे की चौड़ाई उसी लम्बाई के अनुपात में 2:3 है। सफेद पट्टी के केंद्र में गहरा नीला चक्र है, जो चक्र को दर्शाता है। इसका डिजाइन अशोक की राजधानी सारनाथ के शेर के शीर्षफलक के चक्र में दिखने वाले की तरह है। इसकी परिधि लगभग सफेद पट्टी की चौड़ाई के बराबर है इसमें 24 तीलियां हैं। राष्ट्रीय झंडे की डिजाइन 22 जुलाई, 1947 को भारत की संविधान द्वारा अपनाया गया।
समय-समय पर सरकार द्वारा जारी किए जाने वाले गैर सांविधिक अनुदेशनों के अतिरिक्त राष्ट्रीय झंडे का प्रदर्शन प्रतीक और नाम (अनुचित उपयोग की रोक) अधिनियम, 1950 (संख्या 1950 का 12) और राष्ट्रीय गौरव का अनादर अधिनियम, 1971 (संख्या 1971 का 69) के अध्याधीन शासित होता है। भारत का झंडा कोड, 2002 ऐसे सभी नियमों, अभिसमयों, परम्पराओं और सभी संबंधितों के मार्गदर्शन और लाभ के अनुदेशनों को एक साथ मिलाने का प्रयास है।
भारत का झंडा कोड 2002, 26 जनवरी 2002 से प्रवृत हुआ और जैसे ही यह अस्तित्व में आया भारत का झंडा कोड रद्द हो गया। भारत का झंडा कोड 2002 के प्रावधानों के अनुसार सामान्य जनता, निजी संगठनों, शैक्षिक संस्थाओं, आदि द्वारा राष्ट्रीय झंडा का उत्तोलन करने में कोई प्रतिबंध नहीं है केवल प्रतीक एवं नाम (अनुचित उपयोग की रोक) अधिनियम 1950 और राष्ट्रीय गौरव का अनादर अधिनियम, 1971 और कोई अन्य कानून इस विषय पर अधिनियमित किए गए हैं में यह लागू नहीं होता है।
